पुडुचेरी का असर दिखाई दिया तमिलनाडु में, दक्षिण भारत कांग्रेस मुक्त, भाजपा बढ़ा रही पैठ 

पुडुचेरी/रायपुर। वी. नारायणसामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार सोमवार को विधानसभा में बहुमत साबित नहीं कर पाई। हारने के बाद मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने राजभवन जाकर उपराज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन को अपना इस्तीफा सौंप दिया। पिछले कई दिनों से कई विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन सरकार के पास सदन में संख्याबल घटकर 11 रह गया था, जबकि विपक्ष के पास 14 विधायक थे। 33 सदस्यों वाली विधानसभा में अभी कुल 28 सदस्य हैं, जिनमें तीन मनोनीत सदस्य भी शामिल है। द्रमुक के एक नेता जगतरक्षकन, जो अभी लोकसभा सांसद हैं, ने कहा कि अगली बार कांग्रेस और द्रमुक अलग-अलग चुनाव लड़ेगी। तमिलनाडु में द्रमुक कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी या नहीं, यह अभी निश्चित नहीं है, लेकिन पुडुचेरी में गठबंधन टूट गया है। पुडुचेरी की इस सियासी हलचल का असर तमिलनाडु की राजनीति पर भी पड़ेगा। तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक और द्रमुक के बीच कांटे की लड़ाई है। इसी तरह पुडुचेरी में भी दोनों के बीच कड़ी टक्कर है। लेकिन नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी के कारण इन दोनों राज्यों में इस बार के चुनाव में भाजपा अपनी गहरी पैठ बनाएगी। 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा 25 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है, जिसमें से पांच-छह सीटों पर उसके जीतने की संभावना है। इसी तरह पुडुचेरी में भी भाजपा पांच से छह सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। यानी जहां-जहां कांग्रेस मजबूत थी, वहां-वहां भाजपा अपनी पैठ जमाती जा रही है।