बॉलीवुड को अपना गीत और नृत्य का स्वाद नहीं खोना चाहिए : गीता कपूर

मुंबई/रायपुर। बॉलीवुड की फेमस कोरियोग्राफर गीता कपूर बहुत से फिल्मों में अपने कोरियोग्राफी का जलवा दिखा चुकीं हैं। गीता कपूर कहती हैं कि कहानी का प्रारूप बॉलीवुड में बदलाव के दौर से गुजर सकता है लेकिन इसके मूल के रूप में गीत और नृत्य बरकरार रहना चाहिए। बता दें गीता कपूर ने 15 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत कोरियोग्राफर फराह खान की मंडली में शामिल होकर की थीं। बाद में उन्होंने "कुछ कुछ होता है", "दिल तो पागल है", "कभी खुशी कभी गम", "मोहब्बतें”और “कल हो ना हो” कोरियोग्राफ किया। उन्होंने "फिजा", "अशोका", "साथिया", "हे बेबी", "तीस मार खान" और अन्य फिल्मों के लिए कोरियोग्राफ किया है। 47 वर्षीय कोरियोग्राफर ने कहा कि "बॉलीवुड गीत और नृत्य का सार दूर नहीं जाना चाहिए। जिस तरह से हम अपनी फिल्में बनाते हैं उसमें बदलाव होते हैं। हम विकसित होते हैं और यह ठीक है। लेकिन स्वाद हमेशा रहना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि बॉलीवुड ये स्वाद नही बदलेगा।