शिक्षा हुआ महंगा: कॉपी किताबों की कीमतों में तीस फीसदी तक उछाल

रायपुर। कोरोना संक्रमण काल से उबरने की कोशिश कर रहे मध्यम वर्गीय परिवारों को अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए भी महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। आरटीई व शासन की अन्य योजना के तहत कुछ प्रतिशत बच्चों को भले ही मुफ्त में शिक्षा मिल जाए, लेकिन पढ़ने के लिए लगने वाली कॉपी-किताबों सहित अन्य सामग्री के दामों तीस फीसदी तक बढ़ोत्तरी के चलते एक सत्र के लिए ही प्रति बच्चे पर 5 से 7 हजार तक खर्च करना मजबूरी बन गया है। एक तरफ जहां लोगों को बढ़ते पेट्रोल-डीजल, रसोई तेल, टमाटर के दामों ने रूला रखा है। वहीं इस सूची में अब कॉपी-किताबों का भी जिक्र होने लगा है। आर्थिक | रूप से कमजोर पालकों को बीते दो साल से ऑनलाइन क्लासेस होने के चलते इन पर अधिक खर्च न करना पड़ा हो, लेकिन इस बार पहले दिन से खुले स्कूलों ने फिर से बस्ते भरने के लिए सामग्री खरीदी करने मजबूर कर दिया है। हालात यह है कि दो साल पहले से अब के दामों में तीस फीसदी से भी अधिक बढ़ोतरी हो चुकी है। निजी स्कूलों की मनमानी भी ऐसी है कि पालकों को उनके द्वारा चयनित दुकानों से ही सामग्री खरीदने पर मजबूर किया जाता कच्चा माल हुआ महंगा : कुछ कारोबारियों ने बताया कि कॉपी-किताब तैयार करने के लिए जरूरी कच्चे माल के दाम कोरोनाकाल में ज्यादा बढ़ गए हैं। कागज का दाम भी प्रति किलो 60 फीसदी तक बढ़ गया है। यही कारण है कि कॉपी-किताबों का जो सेट पहले औसतन तीन हजार रुपए में आता था, वह इस बार पांच हजार रुपए में बिक रहा है। इसी तरह निजी प्रकाशकों की गणित, विज्ञान, अंग्रेजी की जो किताब 300 से 325 रुपए तक की आती थी, वो अब 400 रुपए तक हो गई है।