ग्राम सुपेला के तालाब में मिली सकर्माउथ कैटफिश प्रजाति की मछली, पाई जाती है अमेरिका के अमेज़न नदी में

कुरूद। क्षेत्र ग्राम सुपेला के तालाब में एक अजीबोगरीब मछली मिली है। यह मछली चर्चा और कौतुहल का विषय बन गई है। बताया जा रहा है कि यह मछली सकर्माउथ कैटफिश प्रजाति की है, जो अमेरिका के अमेज़न नदी में पाई जाती है। आखिर यह मछली हजारों मील दूर अमेरिका से कुरुद क्षेत्र के ग्राम सुपेला में कैसे पहुंची। यह जांच का विषय हो सकता है। विदित हो कि पूर्व में भी ऐसी ही मछली प्रदेश के भोरमदेव के तालाब अभनपुर के तालाब में भी पाई गई थी। बताया जाता है कि यह मांसाहारी मछली इकोसिस्टम के लिए खतरा है।

मिली जानकारी के अनुसार यह मछली अपनी खूबसूरती के कारण आर्नामेंटल मछलियों की श्रेणी में आती है और शौकीन लोग इसे अपने एक्वेरियम में पालते हैं। वही इसके बड़े होने पर आसपास के जल स्रोतों में छोड़ देते हैं। बहरहाल कारण जो भी हो पर लोग इस बात से हैरान हैं की पूरे हिंदुस्तान और दक्षिण एशिया में नहीं पाई जाने वाली यह मछली अमेरिका से इतना लंबा सफर तय कर कुरुद क्षेत्र के ग्राम सुपेला के तालाब में कैसे पहुंची। जानकार बताते हैं कि यह मछली मांसाहारी होने के साथ-साथ इकोसिस्टम के लिए खतरा है। अजीब से मुंह वाली यह मछली सकर्माउथ कैटफिश मांसाहारी होती है। अपने आसपास के जलीय जीव जंतुओं को खाकर ही जीवित रहती है। इसके रहते कोई मछली पनप नहीं सकती स्वादहीन होने के कारण खाने योग्य भी नहीं होती है।


ग्राम सुपेला के ही गौकरण साहू द्वारा तालाब में मछली पकड़ने के लिए जाल डाला गया था। तब यह मछली जाल में फंस कर मिली है। जैसे ही यह मछली मिली तो लोगों में कौतूहल का विषय बन गई। जब जाल में इस मछली को देखा गया तो लोगों में कुछ भय का वातावरण बना पर धीरे से मछली को जाल से निकालकर वापस तालाब में डाल दिया गया है। ग्राम के विनायक साहू तथा अन्य लोगों ने अजीब मुंह और धारीदार लगभग 1 किलो वजनी मछली देखकर हक्का बक्का रह गए और लोगों का कहना है कि ऐसी मछली उन्होंने आज तक नहीं देखी है। जानकारी के अभाव में ग्रामीणों ने इसे फिर से तालाब में डाल दिया है।