दिल्ली के गणतंत्र दिवस परेड में इस बार छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना की झांकी

दिल्ली। गणतंत्र दिवस परेड में इस बार छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना की झांकी लोगों को देखने मिलेगी, इसके साथ छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य ककसार भी देखने को मिलेगा, भिलाई के लोक वाद्य  संग्राहक रिखी क्षत्रिय एवं उनके साथी 25 दिनों से आर आर कैंप नई दिल्ली में इसकी तैयारी में लगे हैं, इस झांकी के माध्यम से राज्य सरकार का जनसम्पर्क विभाग सरकार की इस योजना को पूरे देश की जनता के सामने प्रदर्शित करने जा रहा है।

 छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना की तारीफ इस वक्त पूरे देश में हो रही है। इसलिए इससे संबंधित एक झांकी इस साल गणतंत्र दिवस की परेड में भी शामिल की गई है।  इसकी तैयारी के लिए 25 दिन पहले ही छत्तीसगढ़ के लोक वाद्य संग्राहक रिखी क्षत्रिय की टीम दिल्ली में  डटे हुए है। रिखि की  टीम को 8वी बार इस तरह से झांकी तैयार करने के मौके मिला है,एवं उनकी टीम पारम्परिक वेशभूषा में ककसार नृत्य करते नजर आएंगे। रिखी क्षत्रिय की टीम एक बार गोल्ड मैडल व के बार प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस झांकी की खास बातें  यह है कि ये झांकी तीन भागों में दिखाई जाएगी। जिसमें से पहले भाग में में गाय के गोबर को इकट्ठा करके उन्हें विक्रय के लिए गौठानों के संग्रहण केंद्रों की ओर ले जाती ग्रामीण महिलाओं को दर्शाया गया है। ये महिलाएं पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में होंगी, जो हाथों से बने कपड़े और गहने पहने हुए होंगी। इन्हीं में से एक महिला को गोबर से उत्पाद तैयार कर विक्रय के लिए बाजार ले जाते दिखाया जाएगा। नीचे की ओर गोबर से बने दीयों की सजावट की गई है। ये दीये ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आए स्वावलंबन और आत्मविश्वास को प्रदर्शित करेंगे। इसके मध्य भाग में दिखाया गया है। कि गाय को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केंद्र में रखकर किस तरह पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, पोषण, रोजगार और आय में बढ़ोतरी के लक्ष्यों को हासिल किया जा रहा है। सबसे आखिर में चित्रकारी करती हुई,, ग्रामीण महिला को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक शिल्प और कलाओं के विकास की प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा